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अमेरिका-ईरान युद्ध का नया मोर्चा हॉर्मुज़: बातचीत के संकेत बेअसर

छह महीने से ज्यादा समय से चल रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष का केंद्र अब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ और समुद्री कारोबार बन गया है। सैन्य कार्रवाई, आर्थिक प्रतिबंधों और बातचीत के संकेतों के बावजूद स्थायी युद्धविराम की राह साफ नहीं हुई है।

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बयान

अमेरिका ने चीन को ईरान की मदद पर चेतावनी दी, राजदूत का दावा

CBS News के मुताबिक, चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शी जिनपिंग को साफ कर दिया है कि ईरान को किसी भी तरह की सीधी या परोक्ष मदद “पूरी तरह अस्वीकार्य” है। पर्ड्यू ने CNBC से कहा कि अमेरिका को लगता है कि चीन ने हॉर्मुज़ को बंद रखने में ईरान को परोक्ष समर्थन दिया है, हालांकि उन्होंने माना कि इसका “सीधा सबूत” नहीं है। ट्रंप ने भी कहा कि उन्होंने शी से ईरान युद्ध पर बात की, लेकिन खुफिया मदद रोकने वाले सवाल का जवाब नहीं दिया।

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हॉर्मुज़ में एक और टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल लगने की रिपोर्ट

ब्रिटेन की UKMTO एजेंसी के हवाले से AP ने बताया कि सोमवार को हॉर्मुज़ में प्रवेश कर रहे एक टैंकर को “अज्ञात प्रोजेक्टाइल” लगा। रिपोर्ट के मुताबिक, दो क्रू सदस्यों को मामूली चोटें आईं, लेकिन जहाज अपनी शक्ति से अगले बंदरगाह की ओर बढ़ता रहा। उस समय किसी पर्यावरणीय नुकसान की सूचना नहीं थी। AP ने यह भी लिखा कि कुछ टैंकर फिर से जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं, लेकिन यातायात पहले की तुलना में काफी कम है।

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अराघची ने रूस को ईरान-ओमान ‘सुरक्षित समुद्री मार्ग’ की जानकारी दी

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात में हॉर्मुज़ के लिए ईरान-ओमान समझ के बारे में जानकारी दी। ईरानी पक्ष के बयान के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि यह समझ जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री मार्ग बनाने से जुड़ी है। अराघची ने साथ ही मध्यस्थों के जरिए अमेरिका-ईरान बातचीत की स्थिति और कूटनीतिक प्रक्रिया में लौटने की शर्तों पर भी बात की। यह व्यवस्था हॉर्मुज़ खोलने की व्यापक डील से अलग बताई जा रही है।

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CENTCOM का दावा: 2 दिन में 7 जहाज ईरान की ओर जाने से रोके गए

CBS News के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि हॉर्मुज़ से जुड़ी अमेरिकी नाकाबंदी के तहत बुधवार से शुक्रवार के बीच 7 वाणिज्यिक जहाजों को मोड़ा गया। CBS ने बताया कि जुलाई में नाकाबंदी फिर शुरू होने के बाद कुल 122 जहाज रोके या मोड़े जा चुके हैं। इसी रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया कि पिछले 48 घंटों में अमेरिकी सैन्य एस्कॉर्ट के तहत करीब 4 करोड़ बैरल कच्चा तेल जलडमरूमध्य से निकाला गया। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि रिपोर्ट में नहीं दी गई।

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ट्रंप ने ईरान का 7 दिन वाला हॉर्मुज़ प्रस्ताव ठुकराया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि उन्होंने ईरान का वह प्रस्ताव ठुकरा दिया है, जिसके तहत तेहरान कुछ अमेरिकी शर्तें पूरी होने पर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को 7 दिन में खोलने और क्षेत्रीय लड़ाई रोकने की बात कर रहा था। Reuters के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि ईरान “हार रहा है” इसलिए समझौता चाहता है। AP ने भी बताया कि व्हाइट हाउस ने प्रस्ताव को स्वीकार्य नहीं माना। ईरान ने यह पहल कतर के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाई थी।

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अमेरिका का दावा: 2,000 से ज्यादा जहाजों को हॉर्मुज़ से निकाला

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा है कि अमेरिकी सेना ने पिछले कुछ महीनों में हॉर्मुज़ के रास्ते एक अरब बैरल कच्चा तेल और 2,000 से ज्यादा वाणिज्यिक जहाजों को एस्कॉर्ट किया। उनके मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में कच्चे तेल, कार्गो और LNG की आवाजाही पिछले छह महीनों में सबसे ज्यादा रही। यह अमेरिकी पक्ष का दावा है; उसी समय स्वतंत्र शिप-ट्रैकिंग आंकड़े जलडमरूमध्य में यातायात के बेहद सीमित रहने का संकेत दे रहे हैं।

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हॉर्मुज़ से गुजरने वाले जहाज लगभग ठप

रॉयटर्स के मुताबिक, हॉर्मुज़ में वीकेंड पर जहाजरानी और धीमी हो गई। Kpler के आंकड़ों में शनिवार को सिर्फ पांच कमोडिटी जहाजों के गुजरने और रविवार के लिए किसी ट्रांजिट के दर्ज नहीं होने की बात है। पिछले वीकेंड 31 जहाजों ने जलडमरूमध्य पार किया था। यह गिरावट UAE के उस बयान के बाद आई है जिसमें अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी से जुड़े तीन जहाजों पर पिछले हफ्ते हमले की बात कही गई थी। अमेरिकी-ईरान बातचीत भी इस बीच अटकी हुई है।

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पाकिस्तान ने ईरान से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर बात की

पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने शनिवार को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात की। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, डार ने निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति और वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित व तेज़ passage की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्री यातायात में रुकावटों का असर विकासशील देशों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। दोनों पक्षों ने संपर्क बनाए रखने और न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मिलने पर सहमति जताई।

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ईरान ने युद्ध खत्म करने की शर्तें कतर के जरिए अमेरिका को भेजने का दावा किया

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि तेहरान ने कतर के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया मांगी है। CBS के अनुसार, रेज़ाई ने बताई गई शर्तों में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, ईरान की जब्त संपत्तियां लौटाना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना शामिल बताया। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान सऊदी अरब और यमन से जुड़े संघर्ष को रोकना चाहता है। इन दावों पर अमेरिकी सहमति का कोई संकेत नहीं दिया गया।

समझिए

ट्रंप अगले हफ्ते खाड़ी नेताओं से हॉर्मुज़ और युद्ध पर चर्चा करेंगे

Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान खाड़ी सहयोग परिषद के नेताओं या विदेश मंत्रियों से मुलाकात कर सकते हैं। चर्चा में ईरान युद्ध की अगली दिशा और युद्ध के बाद की रणनीति शामिल होने की उम्मीद है। संभावित बैठक में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। यह पहल हॉर्मुज़ में जहाजरानी बहाल करने और क्षेत्रीय सुरक्षा पर अमेरिकी-खाड़ी समन्वय का संकेत देती है, लेकिन बैठक और उसके नतीजे अभी अंतिम नहीं हैं।

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हॉर्मुज़ में अमेरिकी ड्रोन को कब्जे में लेने की कोशिश का दावा

Axios के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने हॉर्मुज़ के पास उन ईरानी नावों पर हमला किया, जिनके बारे में एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि वे अमेरिकी नौसैनिक ड्रोन को कब्जे में लेने की कोशिश कर रही थीं। ईरानी मीडिया ने घटना को मछली पकड़ने वाली नावों पर अमेरिकी ड्रोन हमले के रूप में पेश किया। ईरान के एक स्थानीय अधिकारी ने कुछ मछुआरों के लापता होने की बात कही और खोज अभियान शुरू होने की जानकारी दी। इस घटना पर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

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अमेरिकी मदद के बावजूद हॉर्मुज़ में जहाजरानी 90% कम

UKMTO के मुताबिक, ओमान के पास अमेरिकी मदद से हॉर्मुज़ से गुजरने वाले जहाजों की औसत संख्या पिछले एक हफ्ते में करीब 24 प्रतिदिन रही। इसके बावजूद जलडमरूमध्य में कुल जहाजरानी युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में लगभग 90% नीचे है। यह आंकड़ा दिखाता है कि अमेरिकी एस्कॉर्ट या मार्गदर्शन से कुछ आवाजाही जारी है, लेकिन सामान्य वाणिज्यिक यातायात बहाल नहीं हुआ है। सुरक्षा घटनाओं और ईरान के स्वीकृत मार्ग से जुड़ी चेतावनियों के बीच जहाज कंपनियां अब भी बड़े जोखिम का सामना कर रही हैं।

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ईरान का दावा: हॉर्मुज़ में टोगो-फ्लैग्ड टैंकर पर हमला

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उसने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में टोगो-फ्लैग्ड तेल टैंकर ‘ट्रेंड’ को निशाना बनाया। ईरानी पक्ष के मुताबिक, जहाज को ‘गैरकानूनी’ रास्ते से गुजरने की कोशिश पर रोका गया और उसमें आग लग गई। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO ने भी एक टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल लगने और आग लगने की सूचना दी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों घटनाएं एक ही जहाज से जुड़ी हैं। स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

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ईरानी प्रतिनिधिमंडल को UN बैठक के लिए अमेरिकी वीजा मंजूर

अमेरिका ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत शीर्ष ईरानी अधिकारियों को अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के लिए वीजा मंजूर किया है। यह फैसला दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष और हॉर्मुज़ को फिर खोलने पर बनी गतिरोधपूर्ण स्थिति के बीच आया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल को यात्रा और खरीद पर कुछ पाबंदियों का सामना करना होगा। वीजा मंजूरी से संपर्क का रास्ता खुला है, लेकिन हॉर्मुज़ या परमाणु वार्ता पर किसी समझौते का संकेत नहीं मिला है।

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अमेरिका-ईरान युद्ध का नया मोर्चा हॉर्मुज़: बातचीत के संकेत बेअसर

अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी 2026 से चल रहा सशस्त्र संघर्ष अब केवल मिसाइल हमलों और सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही, तेल की आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा इस युद्ध का सबसे अहम मोर्चा बन चुके हैं। ईरान जलमार्ग पर दबाव बनाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों पर असर डालना चाहता है, जबकि अमेरिका सैन्य कार्रवाई और प्रतिबंधों के जरिये समुद्री रास्ते खुले रखने की कोशिश कर रहा है।

18 सितंबर को ईरान ने दावा किया कि उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड ने हॉर्मुज़ में टोगो के झंडे वाले तेल टैंकर Trend को निशाना बनाया। इस दावे की तत्काल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे ईरान के दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है। फिर भी, यह घटनाक्रम दिखाता है कि समुद्री रास्ते अब दोनों पक्षों के दबाव और जवाबी कार्रवाई का सीधा मैदान बन गए हैं।

संघर्ष की शुरुआत अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमलों से हुई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड इस अभियान को Operation Epic Fury कहता है। इसके बाद ईरान ने अमेरिकी ठिकानों, क्षेत्रीय सहयोगियों और समुद्री आवाजाही से जुड़े लक्ष्यों पर कार्रवाई की कोशिश की, जबकि अमेरिका ने ईरान के सैन्य, नौसैनिक और ऊर्जा ढांचे पर हमले किए। दोनों पक्ष सैन्य नुकसान और हमलों को लेकर अलग-अलग दावे करते रहे हैं, जिनमें से सभी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जून 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक समझौता या युद्धविराम व्यवस्था बनी थी, लेकिन वह स्थायी शांति में नहीं बदल सकी। बाद में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन के आरोप लगाए और लड़ाई फिर तेज हुई। इस विफल प्रयास ने साफ कर दिया कि केवल अस्थायी सैन्य विराम से परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता, क्षेत्रीय सहयोगी समूहों और प्रतिबंधों से जुड़े मूल विवाद खत्म नहीं होने वाले।

अमेरिका ने सैन्य दबाव के साथ आर्थिक कार्रवाई भी बढ़ाई है। सितंबर में ईरान के विमानन क्षेत्र से जुड़े 36 लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए। इसके बाद ईरान समर्थित मिलिशिया और वित्तीय नेटवर्कों को भी निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, हॉर्मुज़ या लाल सागर में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों, जहाजों के बीमा खर्च और दुनिया भर की आपूर्ति-श्रृंखला पर असर पड़ रहा है। यमन में हूती समूह की गतिविधियां इस संकट को और बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने का खतरा बढ़ाती हैं।

कूटनीति के स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 सितंबर को ईरानी अधिकारियों से सीधे संपर्क और युद्ध के संभवतः समाप्ति की ओर बढ़ने की बात कही। ईरान ने प्रत्यक्ष बातचीत की पुष्टि नहीं की है और कोई नया औपचारिक समझौता भी घोषित नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल बातचीत को शुरू हो चुकी शांति प्रक्रिया नहीं, बल्कि तनाव के बीच उभरा एक सीमित राजनीतिक संकेत ही माना जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र तथ्य-जांच मिशन ने दो अमेरिकी हमलों के मामले में संभावित युद्ध अपराधों के लिए ‘उचित आधार’ मिलने की बात कही है। उसी मिशन ने ईरानी अधिकारियों की कुछ कार्रवाइयों, खासकर विरोध प्रदर्शनों के दमन, को मानवता के खिलाफ अपराधों से जोड़ा है। ये निष्कर्ष गंभीर हैं, लेकिन अंतिम अदालत का फैसला नहीं हैं; दोनों पक्षों के कानूनी और राजनीतिक दावे अब भी विवादित हैं।

अभी इस युद्ध का सबसे बड़ा सवाल यह है कि हॉर्मुज़ में तनाव को सीमित रखा जा सकता है या नहीं। समुद्री मार्ग में किसी बड़े हमले की पक्की पुष्टि, परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी और दोनों पक्षों के बीच लागू होने वाला भरोसेमंद युद्धविराम—आगे की स्थिति इन्हीं तीन मोर्चों पर निर्भर करेगी। फिलहाल सैन्य टकराव जारी है, जबकि कूटनीतिक रास्ता खुलने के संकेत मौजूद तो हैं, पर ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।