जांचकर्ताओं के मुताबिक इस नेटवर्क में एक करणी सेना नेता, एक लाइसेंसी शराब ठेकेदार और उत्तर प्रदेश का एक हिस्ट्रीशीटर शामिल होने की बात सामने आई है।
यानी मामला सिर्फ नकली शराब बेचने वाले किसी एक छोटे विक्रेता का नहीं दिखाई दे रहा।
सागर से ललितपुर तक कनेक्शन
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक जांच में शराब की कथित सप्लाई का लिंक उत्तर प्रदेश के ललितपुर तक पहुंचा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब कहां तैयार हुई, किसने उसे खरीदा, किसने परिवहन किया और सागर के गांवों तक किस नेटवर्क के जरिए पहुंचाया गया।
यही वह हिस्सा है जहां इस मामले की असली तस्वीर सामने आ सकती है।
क्योंकि जहरीली शराब से होने वाली मौतों में अक्सर सबसे नीचे दिखाई देने वाला व्यक्ति पूरी कहानी का सिर्फ आखिरी हिस्सा होता है।
उसके पीछे—
निर्माता कौन था? सप्लायर कौन था? पैसा किसके पास पहुंचा? और स्थानीय स्तर पर संरक्षण किसने दिया?
ये सवाल जांच की दिशा तय करते हैं।
जांच के केंद्र में कौन?
रिपोर्ट के अनुसार जांच में चंद्रभान सिंह राजपूत उर्फ चंदू का नाम प्रमुखता से सामने आया है। पुलिस ने उसे मामले का मुख्य आरोपी बताया है और वह करणी सेना का मंडल अध्यक्ष भी बताया गया है।
इसके अलावा जांच एक लाइसेंसी शराब ठेकेदार और उत्तर प्रदेश के एक हिस्ट्रीशीटर तक पहुंची है।
लेकिन यहां एक जरूरी बात—
पुलिस द्वारा किसी व्यक्ति को आरोपी बताना अदालत में अपराध साबित होने के बराबर नहीं है।
मामले में अंतिम जिम्मेदारी और दोष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
सिस्टम से बड़ा सवाल
जहरीली शराब का कारोबार सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है।
यह प्रशासनिक निगरानी, आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
अगर किसी इलाके में अवैध शराब लंबे समय तक तैयार और वितरित होती रही, तो सवाल यह है कि प्रशासन को इसकी जानकारी कब मिली?
क्या स्थानीय स्तर पर शिकायतें थीं?
क्या सप्लाई नेटवर्क पहले से सक्रिय था?
और अगर था तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया?
इन सवालों के जवाब जांच से सामने आने बाकी हैं।
मौत सिर्फ आंकड़ा नहीं
सागर में जिन लोगों की मौत हुई, उनके परिवारों के लिए यह कोई राजनीतिक बहस नहीं है।
यह रोजमर्रा की जिंदगी का अचानक खत्म हो जाना है।
एक ऐसी शराब, जिसकी गुणवत्ता और स्रोत पर कोई भरोसा नहीं था, लोगों तक पहुंची और उसके बाद परिवारों ने अपने लोगों को खो दिया।
इसलिए इस मामले की जांच का लक्ष्य सिर्फ कुछ लोगों की गिरफ्तारी नहीं होना चाहिए।
पूरे नेटवर्क को समझना और तोड़ना ज्यादा जरूरी है।
सपेरा की नजर
RAJNITIK SAPERA की नजर में इस मामले की सबसे बड़ी कहानी 12 मौतें नहीं, बल्कि उन मौतों तक पहुंचने वाला रास्ता है।
क्योंकि अगर पुलिस सिर्फ गांव में शराब बेचने वाले को पकड़कर मामला बंद कर देती है तो कहानी अधूरी रह जाएगी।
असली सवाल ऊपर तक जाता है—
शराब बनी कहां?
पैसा किसने लगाया?
सप्लाई किसने की?
सीमा पार करके माल किसने पहुंचाया?
और इतने बड़े नेटवर्क को चलने दिया किसने?
जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलता, तब तक सिर्फ छोटे खिलाड़ियों की गिरफ्तारी से समस्या खत्म नहीं होगी।
क्योंकि जहरीली शराब का कारोबार किसी एक गांव की समस्या नहीं है।
यह एक ऐसा नेटवर्क है जिसमें पैसा, अपराध और सिस्टम की कमजोरियां एक-दूसरे से जुड़ सकती हैं।
और इसीलिए सागर की यह कहानी सिर्फ शराब की कहानी नहीं है।
यह उस पूरे नेटवर्क की कहानी है जो नजरों से बचकर चलता रहा—जब तक उसकी कीमत 12 जिंदगियों ने नहीं चुका दी।
यही है—
सपेरा फाइल।
Source: Indian Express Published: 12 सितंबर 2026

